महाराष्ट्र।
महाराष्ट्र में नगर परिषद और नगर पंचायत चुनावों के पहले दो चरणों के नतीजों ने राज्य की सियासत की तस्वीर साफ कर दी है। इन चुनावों में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन ने एक बार फिर अपनी मजबूती साबित की है, जबकि विपक्षी महा विकास आघाड़ी अपेक्षित प्रदर्शन नहीं कर सकी।
राज्य के कुल 288 स्थानीय निकायों में से महायुति गठबंधन ने करीब 207 नगराध्यक्ष पदों पर जीत दर्ज की है। इसके मुकाबले महा विकास आघाड़ी सिर्फ 44 पदों तक सिमट गई। भाजपा ने अकेले 117 से अधिक निकायों में नगराध्यक्ष पद जीतकर सबसे बड़ी पार्टी का दर्जा कायम रखा। वहीं एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना को 53 और अजित पवार की राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी को 37 नगराध्यक्ष पद मिले।
एक वोट ने बदल दी जीत-हार की कहानी
इन चुनावों में हर वोट की अहमियत भी साफ तौर पर देखने को मिली। नांदेड़ जिले के मुखेड नगर परिषद में भाजपा उम्मीदवार प्रमिला पंचाल महज एक वोट से नगराध्यक्ष चुनी गईं। उन्हें 779 वोट मिले, जबकि AIMIM उम्मीदवार एक वोट पीछे रह गए। हार के बाद पुनर्गणना की मांग की गई, लेकिन परिणाम में कोई बदलाव नहीं हुआ।
इस करीबी जीत के बाद प्रमिला पंचाल ने कहा कि अब उन्हें एक वोट की असली कीमत समझ में आ गई है।
परिवारवाद को मतदाताओं ने किया खारिज
चुनाव नतीजों में यह संकेत भी मिला कि मतदाता अब परिवारवाद को स्वीकार करने के मूड में नहीं हैं। नांदेड़ जिले के लोहे नगर परिषद में एक ही परिवार के छह सदस्य चुनाव मैदान में थे, लेकिन जनता ने सभी को नकार दिया।
इस चुनाव में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी ने अध्यक्ष पद जीतते हुए कुल 17 सीटों पर कब्जा जमाया। यह परिणाम स्थानीय राजनीति में बदलते जनमत को दर्शाता है।
40 साल बाद कमठी में भाजपा की जीत
नागपुर जिले की कमठी नगर परिषद में भाजपा ने 40 साल बाद नगराध्यक्ष पद जीतकर इतिहास रच दिया। भाजपा उम्मीदवार अजय अग्रवाल ने कांग्रेस प्रत्याशी को 103 वोटों से हराया।
हालांकि हार के बाद कांग्रेस की ओर से नतीजों को लेकर सवाल उठाए गए, लेकिन आधिकारिक परिणामों में कोई बदलाव नहीं हुआ।
पहले चरण में महायुति का दबदबा
2 और 20 दिसंबर को हुए मतदान के बाद आए नतीजों में भाजपा के नेतृत्व वाली महायुति ने स्पष्ट बढ़त बनाई। सीटों की संख्या के साथ-साथ रणनीति और संगठन के स्तर पर भी गठबंधन विपक्ष पर भारी नजर आया।
कुल मिलाकर, महाराष्ट्र के इन निकाय चुनावों ने यह साफ कर दिया है कि लोकतंत्र में हर वोट की अहमियत है। मतदाता अब ज्यादा सजग हो चुके हैं और स्थानीय स्तर पर भी प्रदर्शन व विश्वसनीयता को प्राथमिकता दे रहे हैं। ये नतीजे आने वाले चुनावों के लिए सभी राजनीतिक दलों के लिए एक स्पष्ट संदेश माने जा रहे हैं।
