नौघटा में तीन साल से अवैध डोलोमाइट खनन का आरोप, निजी जमीन 40 फीट तक खोदी गई, क्रेशर–खनिज विभाग की भूमिका पर सवाल

सारंगढ़ ।।नौघटा क्षेत्र में वर्ष 2022 से बड़े पैमाने पर अवैध डोलोमाइट खनन की जानकारी सामने आई है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, यह खनन रमेशचंद डनसेना द्वारा कराया जा रहा है, जो गठियापाली निवासी एवं जिला बरगढ़ (उड़ीसा) का बताया जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि नौघटा स्थित एक निजी भूमि में बिना वैध अनुमति के लगातार डोलोमाइट निकाला गया।

 

ग्रामीणों की जानकारी के मुताबिक, इस अवैध खनन से निकाला गया डोलोमाइट पत्थर पिछले लगभग तीन वर्षों से कटंगपाली क्षेत्र के क्रेशरों में भेजा जा रहा है। इतने लंबे समय तक खनन सामग्री की आपूर्ति होने के आधार पर यह सवाल खड़ा हो रहा है कि जिन क्रेशरों में यह पत्थर खपाया गया, वे किस वैधानिक प्रक्रिया के तहत संचालित हो रहे थे।

 

बताया जा रहा है कि जिस निजी भूमि में खनन किया गया है, वहां अब लगभग 40 फीट तक गहरा गड्ढा बन चुका है। ग्रामीणों का अनुमान है कि इस अवधि में लाखों टन डोलोमाइट पत्थर निकाला जा चुका होगा। इस स्थिति ने पर्यावरणीय क्षति के साथ-साथ राजस्व से जुड़े गंभीर सवाल भी खड़े कर दिए हैं।

 

ग्रामीणों का कहना है कि जब खनन अवैध रूप से किया गया, तो उससे निकले पत्थर की रॉयल्टी को वैध कैसे माना गया। यदि खनन की मूल प्रक्रिया ही नियमों के विपरीत थी, तो रॉयल्टी भुगतान और परिवहन से जुड़े दस्तावेजों की वैधता पर भी संदेह स्वाभाविक है।

 

इस पूरे मामले में खनिज विभाग की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। ग्रामीणों के अनुसार, अवैध खनन की जानकारी पूर्व में जिला कार्यालय स्थित खनिज विभाग को दी गई थी, लेकिन न तो मौके पर किसी प्रकार का निरीक्षण हुआ और न ही किसी ठोस कार्रवाई की जानकारी सामने आई।

 

फिलहाल यह पूरा मामला ग्रामीणों द्वारा साझा की गई जानकारी और आरोपों के आधार पर सामने आया है, जिसने क्षेत्र में अवैध खनन, क्रेशर संचालन और विभागीय निगरानी व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगा दिए हैं।

 

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