कटंगपाली (संवाददाता):
कटंगपाली में अवैध खनन का मामला अब और भी गंभीर होता जा रहा है। गुरुवार 26 मार्च को पंचायत की शिकायत पर माइनिंग विभाग द्वारा आशीष गोयल के कथित डोलोमाइट खदान पर की गई छापेमार कार्रवाई के बाद नए खुलासे सामने आ रहे हैं।
ग्रामीणों के द्वारा मिली जानकारी के अनुसार, जिस खदान में खनन किया जा रहा था, उसका लीज वर्ष 2024 में ही समाप्त हो चुका था। इतना ही नहीं, खननकर्ता आशीष गोयल द्वारा उक्त खदान को पहले ही सरेंडर किए जाने की बात भी सामने आई है। इसके बावजूद, पिछले कई महीनों से वहां बिना किसी रोक-टोक के लगातार अवैध खनन जारी था।
यह स्थिति अपने आप में कई बड़े सवाल खड़े करती है—जब खदान का लीज समाप्त हो चुका था और उसे विधिवत सरेंडर भी कर दिया गया था, तो आखिर इतने लंबे समय तक वहां खनन कैसे चलता रहा? क्या संबंधित विभागों को इसकी जानकारी नहीं थी, या फिर जानबूझकर अनदेखी की गई?
ग्रामीणों का आरोप है कि अवैध खनन खुलेआम चल रहा था, लेकिन जिम्मेदार अधिकारियों द्वारा कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में हालिया छापेमार कार्रवाई को भी लोग संदेह की नजर से देख रहे हैं।
ग्रामीणों का कहना है कि माइनिंग टीम ने मौके पर पहुंचकर पंचनामा जरूर बनाया और 4 पोकलेन मशीन व 2 हाईवा वाहन जप्त करने की बात कही, लेकिन उन्हें किसी के सुपुर्द नहीं किया गया। इससे यह शक और गहरा गया है कि कार्रवाई केवल औपचारिकता निभाने के लिए की गई।
कुछ लोगों का यह भी मानना है कि पंचायत और खननकर्ता के बीच किसी प्रकार का समझौता हो चुका है, जिसके चलते मामला अंदर ही अंदर सुलझा लिया गया और कार्रवाई का असर जमीन पर नजर नहीं आ रहा।
इस पूरे मामले में जब हमने माइनिंग विभाग के प्रभारी खनि निरीक्षक दीपक पटेल से 8085644448 नंबर पे संपर्क करने की कोशिश की, तो उन्होंने मोबाइल कॉल का कोई जवाब नहीं दिया। विभाग की चुप्पी अब कई गंभीर सवालों को जन्म दे रही है।
कटंगपाली के ग्रामीण अब यह जानना चाहते हैं कि आखिर अवैध खनन पर कब तक सिर्फ दिखावटी कार्रवाई होती रहेगी, और असल में जिम्मेदारों पर कब कार्रवाई होगी।
