सरिया–बरमकेला–चंद्रपुर के बीच फैला डोलोमाइट बेल्ट अब सिर्फ खनन नहीं, बल्कि लोगों की सेहत पर सीधा हमला बन चुका है।
धूल से घुटती सांसें, बीमार होता भूगोल और प्रशासन की चुप्पी—इसी के बीच अब विरोध की चिंगारी भड़क उठी है।
🔥 जनसुनवाई से पहले ही बढ़ा तनाव
कटंगपाली और साल्हेओना क्षेत्र में 6 और 7 अप्रैल को प्रस्तावित जनसुनवाई अब विवादों में घिरती नजर आ रही है। पांच फर्मों द्वारा डोलोमाइट उत्पादन क्षमता बढ़ाने की तैयारी है, जिसके तहत हर साल लगभग 5 लाख टन अतिरिक्त खनन का रास्ता साफ किया जा रहा है।
कागजों में इसे “जनभागीदारी” बताया जा रहा है, लेकिन जमीनी स्तर पर लोगों में गहरा आक्रोश है। ग्रामीणों का कहना है कि यह पूरी प्रक्रिया सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती है, जहां आम लोगों की आवाज दबा दी जाती है।
⚠️ स्वास्थ्य बनाम राजस्व की लड़ाई
इस पूरे इलाके में वर्षों से खदान और क्रशर संचालन के बावजूद
न मजदूरों की नियमित स्वास्थ्य जांच
न डोलोमाइट डस्ट से होने वाली बीमारियों का रिकॉर्ड
न कोई ठोस स्वास्थ्य योजना
स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रशासन सिर्फ राजस्व बढ़ाने में लगा है, जबकि लोगों के फेफड़े धीरे-धीरे बीमार हो रहे हैं।
Aryan Minerals की जनसुनवाई पर खास नजर
7 अप्रैल 2026 को आर्यन मिनरल्स एंड मेटल्स प्रा.लि. की जनसुनवाई प्रस्तावित है, जिसमें कंपनी अपनी उत्पादन क्षमता 1 लाख टन से बढ़ाकर 2,00,198 टन प्रतिवर्ष करने जा रही है।
करीब 4.961 हेक्टेयर क्षेत्र में फैला यह प्रोजेक्ट 2067 तक संचालित होना है, यानी आने वाले दशकों तक प्रदूषण का खतरा बरकरार रहेगा।
अब मैदान में उतरे Radhey Shyam Sharma
इस पूरे मुद्दे ने अब बड़ा मोड़ ले लिया है।
रायगढ़ के विख्यात और तेजतर्रार सामाजिक कार्यकर्ता राधे श्याम शर्मा ने खुलकर ऐलान किया है—
“गलत तरीके से जनसुनवाई किसी भी हाल में होने नहीं देंगे।”
उनके नेतृत्व में विरोध तेज होने जा रहा है।
इसके लिए बोंदा में एक अहम बैठक बुलाई गई है, जहां शर्मा क्षेत्र के ग्रामीणों से मुलाकात कर समर्थन जुटाएंगे।
ग्रामीणों का बढ़ता आक्रोश
सूत्रों के मुताबिक,
बड़ी संख्या में ग्रामीण जनसुनवाई में विरोध दर्ज कराने की तैयारी में हैं
लोगों का कहना है कि उनकी जमीन, हवा और पानी की कीमत पर उद्योग को बढ़ावा दिया जा रहा है
कई लोग इसे “बीमार विकास मॉडल” बता रहे हैं
❗ बड़ा सवाल
जब सालों से चल रहे खनन का असर साफ दिख रहा है,
तो क्या बिना ठोस स्वास्थ्य और पर्यावरणीय सुरक्षा के उत्पादन बढ़ाना सही है?
📢 बहरहाल
कटंगपाली और साल्हेओना की यह जनसुनवाई अब सिर्फ एक औपचारिक प्रक्रिया नहीं रही, बल्कि
👉 जनता बनाम सिस्टम की सीधी लड़ाई बनती जा रही है।
अब देखना यह होगा कि क्या प्रशासन लोगों की आवाज सुनेगा
या यह जनसुनवाई भी पहले की तरह कागजी खानापूर्ति बनकर रह जाएगी।
Dolomite Hearing Clash: Katangpali-Salheona में जनसुनवाई पर घमासान, Radhey Shyam Sharma उतरे मैदान में
