सारंगढ़। खनिज विभाग में नई पोस्टिंग पाते ही अपनी सख्त कार्यशैली से पहचान बनाने वाले युवा खनि निरीक्षक चंद्राकर के सामने अब एक नई चुनौती खड़ी हो गई है। गुडेली क्षेत्र में हाल ही में हुई ताबड़तोड़ कार्रवाइयों ने विभाग के साथ-साथ चंद्राकर का भी खौफ पैदा किया था, भले ही यह पूरी कार्रवाई कलेक्टर पद्मिनी भोई साहू के निर्देशन में संचालित हुई हो, लेकिन मैदानी स्तर पर पहचान चंद्राकर की ही बनी।
अब सूत्रों और स्थानीय चर्चाओं के हवाले से जो जानकारी सामने आ रही है, वह विभाग की कार्यप्रणाली पर ही सवाल खड़े करने वाली है। बताया जा रहा है कि गुडेली और टीमरलगा बैरियर से बिना रॉयल्टी पर्ची के गिट्टी लदी गाड़ियां बेरोकटोक फर्राटा भर रही हैं। यह जानकारी फिलहाल क्षेत्र में चल रही चर्चाओं पर आधारित है और इसे विशुद्ध रूप से सूचनार्थ प्रस्तुत किया जा रहा है, लेकिन अगर इसमें जरा भी सच्चाई है तो यह सीधे तौर पर विभागीय नाकामी का प्रमाण माना जाएगा।
गौरतलब है कि जिस अधिकारी ने अभी हाल ही में कई क्रेशर को सीलबंद करने का कड़ा रुख अपनाकर सुर्खियां बटोरी थीं, उसी के क्षेत्राधिकार में अगर बिना रॉयल्टी की गाड़ियां आसानी से निकल रही हैं, तो यह विरोधाभास कई सवाल खड़े करता है। क्या कार्रवाई महज दिखावा भर थी? या फिर बैरियर पर तैनात अमला ही मिलीभगत कर रहा है?
स्थानीय लोगों का कहना है कि शासन को इससे सीधे राजस्व की हानि हो रही है, और अगर समय रहते इस पर लगाम नहीं कसी गई तो यह सिलसिला और बढ़ सकता है। ऐसे में जिम्मेदार विभाग और उसके अफसरों से अपेक्षा की जा रही है कि वे इस मामले को गंभीरता से लें और तत्काल जांच बिठाकर दोषियों पर कार्रवाई सुनिश्चित करें।
देखना यह होगा कि क्या नव पदस्थ खनि निरीक्षक चंद्राकर अपनी पहले वाली सख्ती दोहराते हुए इस मामले पर भी संज्ञान लेते हैं, या फिर गुडेली और टीमरलगा बैरियर से यह “खेल” यूं ही चलता रहेगा।
गुडेली में बिना रॉयल्टी गिट्टी गाड़ियों की आवाजाही, नव पदस्थ खनि निरीक्षक चंद्राकर के लिए बड़ी चुनौती
